बांग्लादेश के स्वतंत्रता के बाद के सबसे उथल-पुथल वाले राजनीतिक दौर में ढाका की एक विशेष अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई है। अदालत के मुताबिक, 2024 में हिंसक सरकारी कार्रवाई के दौरान सैकड़ों लोगों की मौत के लिए हसीना को दोषी पाया गया। महीनों चले हाई-प्रोफाइल मुकदमे के बाद आया यह फैसला देश और क्षेत्र की राजनीति में भूचाल लाने वाला है।
शेख हसीना, जो अगस्त 2024 में छात्र आंदोलनों और राजनीतिक अस्थिरता के बीच भारत भाग गई थीं, ने इस पूरी प्रक्रिया को राजनीति से प्रेरित करार देते हुए ‘कंगारू कोर्ट’ बताया। उनके बेटे सजीद वाजेद ने इंटरव्यू में कहा कि उनकी मां फैसले से बेहद आहत और क्रोधित हैं और पार्टी पर लगे प्रतिबंध हटने और निष्पक्ष चुनाव की मांग को लेकर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
इस बीच, नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया निष्पक्ष रही है और देश में लोकतंत्र व कानून-व्यवस्था की स्थापना के लिए नया 26-सूत्रीय सुधार चार्टर प्रस्तावित किया गया है, जिसमें प्रधानमंत्री पद की समयसीमा और सत्ता में संतुलन जैसे प्रावधान शामिल हैं।
ढाका और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। बम धमाकों, आगजनी और हड़तालों के कारण जनजीवन प्रभावित हो रहा है। फैसले के प्रसारण के दौरान देशभर में तनाव का माहौल रहा और नए हिंसक विरोध-प्रदर्शनों की आशंका जताई जा रही है। भारत सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय शक्तियां स्थिति पर करीबी नजर रख रही हैं।
मुख्य प्रतिक्रियाएँ:
- हसीना समर्थकों ने फैसले को अन्यायपूर्ण तथा अलोकतांत्रिक बताते हुए विरोध तेज़ कर दिया है।
- सरकार ने विपक्ष पर अशांति फैलाने का आरोप लगाया और नागरिकों से संयम बरतने की अपील की है।
- मानवाधिकार संगठनों और विदेशी राजनयिकों ने निष्पक्षता और शांति कायम रखने का आग्रह किया है।
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